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24 Tirthankar Argh Stands -24 तीर्थंकर अर्घ्य

24 Tirthankar Argh Stands -24 तीर्थंकर अर्घ्य

🪔 २४ तीर्थंकर (Argh Stand Variants)

  1. ऋषभदेव (आदिनाथ) – प्रथम तीर्थंकर, जिन्होंने मानवता को कृषि, कला और धर्म का मार्ग दिखाया।

  2. अजितनाथ – अहिंसा और शांति के प्रतीक, दूसरे तीर्थंकर।

  3. सम्भवनाथ – करुणा और सेवा भावना से पूजनीय।

  4. अभिनन्दननाथ – विनम्रता और संतोष का संदेश देने वाले।

  5. सुमतिनाथ – सादगी और सच्चाई से जीवन जीने की प्रेरणा।

  6. पद्मप्रभु – जिनकी आभा कमल के समान पवित्र मानी जाती है।

  7. सुपार्श्वनाथ – रक्षा और धर्म पालन के प्रतीक।

  8. चन्द्रप्रभु – शीतल और शांत स्वभाव के लिए पूजनीय।

  9. पुष्पदंत (सुविधिनाथ) – पुण्य और सेवा का उपदेश देने वाले।

  10. शीतलनाथ – शांति और सहनशीलता के आदर्श।

  11. श्रेयांसनाथ – त्याग और संयम के लिए प्रसिद्ध।

  12. वासुपूज्य – करुणा और दान के प्रतीक।

  13. विमलनाथ – निर्मलता और पवित्रता के आदर्श।

  14. अनन्तनाथ – ज्ञान और अनन्त सुख के दूत।

  15. धर्मनाथ – धर्म, सत्य और न्याय के उपदेशक।

  16. शान्तिनाथ – शांति और तपस्या के लिए पूजनीय।

  17. कुन्तुनाथ – संतुलन और संयम का संदेश देने वाले।

  18. अरनाथ – वैराग्य और आत्मसंयम के प्रेरणास्रोत।

  19. मल्लिनाथ – तपस्या और पवित्रता के प्रतीक।

  20. मुनिसुव्रत स्वामी – व्रत और संयम के आदर्श।

  21. नामिनाथ – विनय और धर्मपालन के लिए पूजनीय।

  22. नेमिनाथ – करुणा और अहिंसा का उपदेश देने वाले।

  23. पार्श्वनाथ – धर्म और करुणा से मानवता को मार्गदर्शन देने वाले।

  24. महावीर स्वामी – २४वें तीर्थंकर, जिनसे जैन धर्म का मूल दर्शन अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह है।


✨ अन्य पूजन स्वरूप (Extra Variants)

  1. समुच्च चौबीसी – सभी २४ तीर्थंकरों का सामूहिक पूजन स्वरूप।

  2. बाहुबली जी – तपस्या और अहिंसा के महान प्रतीक।

  3. पंच मेरु – पांच पर्वतों पर आधारित पूजन प्रतीक।

  4. गंधोदक – जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक से प्राप्त पवित्र जल।

  5. जीनवाणी माता – जिनवाणी (धर्म उपदेश) का स्वरूप, ज्ञान की देवी।

  6. पद्मावती माता – धर्म की रक्षा करने वाली यक्षिणी।

  7. क्षेत्रपाल जी – जिनालय की रक्षा करने वाले देव।

  8. नन्दीश्वर द्वीप – जिन पूजा का पवित्र द्वीप, शास्त्रों में वर्णित |



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🪔 २४ तीर्थंकर (Argh Stand Variants)

  1. ऋषभदेव (आदिनाथ) – प्रथम तीर्थंकर, जिन्होंने मानवता को कृषि, कला और धर्म का मार्ग दिखाया।

  2. अजितनाथ – अहिंसा और शांति के प्रतीक, दूसरे तीर्थंकर।

  3. सम्भवनाथ – करुणा और सेवा भावना से पूजनीय।

  4. अभिनन्दननाथ – विनम्रता और संतोष का संदेश देने वाले।

  5. सुमतिनाथ – सादगी और सच्चाई से जीवन जीने की प्रेरणा।

  6. पद्मप्रभु – जिनकी आभा कमल के समान पवित्र मानी जाती है।

  7. सुपार्श्वनाथ – रक्षा और धर्म पालन के प्रतीक।

  8. चन्द्रप्रभु – शीतल और शांत स्वभाव के लिए पूजनीय।

  9. पुष्पदंत (सुविधिनाथ) – पुण्य और सेवा का उपदेश देने वाले।

  10. शीतलनाथ – शांति और सहनशीलता के आदर्श।

  11. श्रेयांसनाथ – त्याग और संयम के लिए प्रसिद्ध।

  12. वासुपूज्य – करुणा और दान के प्रतीक।

  13. विमलनाथ – निर्मलता और पवित्रता के आदर्श।

  14. अनन्तनाथ – ज्ञान और अनन्त सुख के दूत।

  15. धर्मनाथ – धर्म, सत्य और न्याय के उपदेशक।

  16. शान्तिनाथ – शांति और तपस्या के लिए पूजनीय।

  17. कुन्तुनाथ – संतुलन और संयम का संदेश देने वाले।

  18. अरनाथ – वैराग्य और आत्मसंयम के प्रेरणास्रोत।

  19. मल्लिनाथ – तपस्या और पवित्रता के प्रतीक।

  20. मुनिसुव्रत स्वामी – व्रत और संयम के आदर्श।

  21. नामिनाथ – विनय और धर्मपालन के लिए पूजनीय।

  22. नेमिनाथ – करुणा और अहिंसा का उपदेश देने वाले।

  23. पार्श्वनाथ – धर्म और करुणा से मानवता को मार्गदर्शन देने वाले।

  24. महावीर स्वामी – २४वें तीर्थंकर, जिनसे जैन धर्म का मूल दर्शन अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह है।


✨ अन्य पूजन स्वरूप (Extra Variants)

  1. समुच्च चौबीसी – सभी २४ तीर्थंकरों का सामूहिक पूजन स्वरूप।

  2. बाहुबली जी – तपस्या और अहिंसा के महान प्रतीक।

  3. पंच मेरु – पांच पर्वतों पर आधारित पूजन प्रतीक।

  4. गंधोदक – जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक से प्राप्त पवित्र जल।

  5. जीनवाणी माता – जिनवाणी (धर्म उपदेश) का स्वरूप, ज्ञान की देवी।

  6. पद्मावती माता – धर्म की रक्षा करने वाली यक्षिणी।

  7. क्षेत्रपाल जी – जिनालय की रक्षा करने वाले देव।

  8. नन्दीश्वर द्वीप – जिन पूजा का पवित्र द्वीप, शास्त्रों में वर्णित |



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